Click here for Myspace Layouts

सर्वाधिकार सुरक्षित

सर्वाधिकार सुरक्षित @इस ब्लॉग पर प्रकाशित हर रचना के अधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं |

मंगलवार, 19 जनवरी 2010

कभी-कभी सोचती हूँ...........

जाने क्या है जाने क्या नहीं

बहुत है मगर फिर भी कुछ नहीं

तुम हो मै हूँ और ये धरा

फिर भी जी है भरा भरा

कभी जो सोचूँ तो ये पाऊँ

मन है बावरा कैसे समझाऊ

कि न मैं हूँ न हो तुम

बस कुछ है तन्हा सा गुम.......................!!

सु..मन 

1 टिप्पणी: