गुरुवार, 27 जनवरी 2011

जिन्दगी–ए-उल्फत




















सबब है आखिर क्या
        
           ये किसने जाना है ;

जिन्दगी को यहाँ
       
           किसने अब तक जाना है ;

जिन्दगीए-उल्फत में यहाँ
        
           क्या किसी ने पाया है ;

दर्द-ए-दिल का ऐ सुमन
       
           न कोई यहाँ सरमाया है !!


सु..मन 

21 टिप्‍पणियां:

  1. चंद शब्दों में गहरी बात कहना कोई आपसे सीखे...बहुत अच्छी रचना...

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  2. सभी को तो नहीं मिलता,
    कभी जीने का मतलब भी,

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  3. प्रवीण जी ..ठीक कहा कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता...

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  4. आपने क्या खूब फ़रमाया है ... दर्द - ऐ - दिल का न कोई यहाँ सरमाया है ..... बहुत खूब

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  5. सुन्दर रचना

    (¯`*•..๑۩۞۩๑ thanks ๑۩۞۩๑..•*´¯)

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  6. सच कहा……………सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  7. अच्छी रचना सुमन जी.
    वैसे किसी ने कहा भी है...
    ज़िन्दगी...कैसी है पहेली हाय.

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  8. सबब है आखिर क्या ... बहुत सुंदर !

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  9. सच है अपने दर्द खुद ही झेलने होते हैं .. गहरे जज्बात ..

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