शनिवार, 19 फ़रवरी 2011

जिन्दगी : बस यूँ ही
















     1

जिन्दगी की खुशियाँ
दामन में नहीं सिमटती
ऐ मौत ! आ
तुझे गले लगा लूँ...........


    2

जिन्दगी एक काम कर
मेरी कब्र पर
थोड़ा सकून रख दे
कि मर कर
जी लूँ ज़रा..........
   


  3
 
जिन्दगी दे दे मुझे
चन्द टूटे ख़्वाब
कुछ कड़वी यादें
कि जीने का
कुछ सामान कर लूँ........




                                                                            सु..मन 

बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

इक क़तरा जिन्दगी का...



    तू दूर रह कर भी मेरे पास है

  जाने कैसा ये तेरा एहसास है

बावरा मन ये कहता है मेरा

     तू हमनवा हमखयाल है मेरा !!

                       

                                                                              सु..मन 
                                                    

मंगलवार, 8 फ़रवरी 2011

“प्रकृति के रंग”


बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं....... इस अवसर पर मेरी एक पुरानी कविता डाल रही हूँ ।आशा करती हूँ आप सबको पसन्द आयेगी.....


शाम ढल आई

मेघ की गहराई

नीर बन आई

आसमा की तन्हाई

न किसे भी नज़र आई ;




रातभर ऐसे बरसे मेघ

सींचा हर कोना व खेत

न जाना कोई ये भेद

किसने खेला है ये खेल ;




प्रभात में खिला उजला रूप

धुंध से निकली किरणों मे धूप

खेत में महका बसंत भरपूर

अम्बर आसमानी दिखा मगरूर ;




पंछियों से उड़े मतवाले पतंग

डोर को थामे मन मस्त मलंग

मुग्ध हूँ देख “प्रकृति के रंग”

कैसे भीगी रात की तरंग

ले आई है रश्मि की उमंग !!





........................................         सु..मन