बुधवार, 16 फ़रवरी 2011

इक क़तरा जिन्दगी का...



    तू दूर रह कर भी मेरे पास है

  जाने कैसा ये तेरा एहसास है

बावरा मन ये कहता है मेरा

     तू हमनवा हमखयाल है मेरा !!

                       

                                                                              सु..मन 
                                                    

25 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों....बेहतरीन भाव....खूबसूरत कविता...

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  2. दिल के सुंदर एहसास
    हमेशा की तरह आपकी रचना जानदार और शानदार है।

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  3. खम शब्दों में ढेर सारी भाव्नाएं आप ने व्यक्त की है ! ज्यादा कहना सूरज को दीप दिखाने जैसा है ! You are a prolific writer. How could u write so much and so good.

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  4. बहुत उम्दा.
    आपके चंद अलफ़ाज़ ही बहुत कुछ ब्याँ कर जाते हैं.
    सलाम.

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  6. बहुत खूब ... जिंदगी जीने के लिए यादों का होना जरूरी है ... फिर चाहे कडवी ही क्यों न हों .... ...

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  7. Wahh!
    Bohot khoob aapne apne dil ki baat ko bayan kiya !

    Enjoyed reading it :)
    I m ur new follower :)
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  8. Really this is very heart touching feeling exploring here....thanks a lot 4 being with us in this way !!!!

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