मंगलवार, 5 जुलाई 2011

अब जो मिले तो न बिछड़ेगें ......
















अब के
जो मिले हम
तो न बिछ्ड़ेगें
हम कभी
ये सोचकर
चल दी थी
मैं
एक बार फिर
जीवन की डगर पर
मन की डोर थामे
लगी थी नापने
कल्पना से हकीकत की
लम्बाई
विश्वास के धागे से
जो अटूट था
इस डगर की
सँकरी गलियाँ
कुछ अन्धे मोड़
तेरी प्यार भरी नज़र से
तय कर
आगे बढ़ी थी मैं
कांटों समान कंकर
बीनती
तेरी हर राह को
कलियों से भरकर
खिल गई थी
सुमन की तरह
लगता था
अब के
जो मिले हम
तो न बिछडेगें
न होगी
कोई भी शिकायत
हमारे बीच
पर..........
न चाहते हुए भी
कल्पना से हकीकत की
ये लम्बाई
न तय कर पाए हम
न विश्वास के डोर
कच्ची थी
न ही प्यार की गहराई
कम थी
बस ख्यालातों के रास्ते
अलग अलग हो गए
कि तुम्हारी मंजिल
ठहराव थी
और मेरी
प्यार का सफर
ये विचारों की कशमकश में दबकर
हमारे कदमों का फासला
बढ़ता गया
और हम
चल दिए
अपनी एकल डगर पर
और
टूट गया
इस बार भी
मेरा भरम
कि
अब के
जो मिले हम
तो न बिछ्ड़ेगें
 तो न बिछ्ड़ेगें...............
                                 सु..मन 

19 टिप्‍पणियां:

  1. मिलन जुदाई संग में और बहुत आयाम
    सुमन सुमन से ये कहे यह जीवन संग्राम
    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  2. मृग तृष्णा सी प्रीत
    श्वासों का संगीत
    इस दुनियाँ की रीत
    हार में ही जीत.
    मर्म-स्पर्शी अभिव्यक्ति.

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  3. पर यह विश्वास कभी न टूटे, तार जुड़ने लगेंगे अपने आप ही।

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  4. एकला ही चलना पडता है हर डगर पर …………बहुत सुन्दर रचना।

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  5. भावात्मक..अभिव्यक्ति..
    उम्मीद पर दुनिया है..बनाये रखें

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  6. आपकी इस उत्कृष्ट प्रवि्ष्टी की चर्चा आज शुक्रवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है!

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  7. asha aur nirasha ke beech jhooltin hui bhawuk kavita......bahut achchi lagi.

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  8. कोशिश तो फिर भी करते हैं की न बिछड़े कभी पर ... कभी किस्मत कभी समय ये होने नहीं देता ... लाजवाब ... गहराई लिए है रचना ...

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  9. जो मिलेगा वो बिछड़ेगा.. यही सच्चाई है.. अभी जान लें तो बेहतर है नहीं तो दुःख अधिक होगा..
    पर हम हमेशा भूल कर ही बैठते हैं और फिर दुःख के सागर में गोते लगाने पड़ते हैं..

    परवरिश पर आपके विचारों का इंतज़ार है..
    आभार

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  10. आपकी किसी पोस्ट की चर्चा शनिवार (१६-०७-११)को नयी-पुरानी हलचल पर होगी |कृपया आयें और अपने विचार दें |आभार.

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  11. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब रचना! उम्दा प्रस्तुती!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://seawave-babli.blogspot.com/
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/

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  12. सुमन तुम तो कभी कभी ऐसा लिख देती हो कि ,मन भीग सा जाता है , शब्द नहीं होते है , कुछ भी कहने के लिये .. ये नज़्म भि कुछ ऐसी है .. आँखों से गुजर कर दिल में बस गयी है ..

    आभार

    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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