गुरुवार, 21 जुलाई 2011

काश ऐसा होता…....



काश ऐसा होता

      उड़ सकती मैं भी
  
      खुले आसमां में

     पंछियों की तरह

बादलों के संग

        धीरे धीरे विचरती
  
               काश ऐसा होता.........

       चल सकती मैं भी

    हवा के साथ साथ

 गुनगुनाती हुई

        रागिनी की तरह

               काश ऐसा होता..........

        पहुंच जाती मैं भी

      तारों के गुलिस्ताँ में

 चाँद के संग

           चाँदनी की तरह

           इठलाती हुई

               निशा के संग

             धीरे-धीरे विचरती


            काश ऐसा होता.......

       काश ऐसा होता.......
          

                                                                                 सु..मन 

   

33 टिप्‍पणियां:

  1. हमारी ऐसी इच्‍छा नहीं होती, बस जी करता है रूटीन जि‍न्‍दगी से ढेर सारी छुटि‍टयां मि‍ल जायें और सब लोग बाय बाय कह दें...तो पैदल ही सारी धरती नाप लें।

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  2. Sha ji...sach kha aapne... kash sach me pankh lag jaye aur udh ke dharti ko naap len..

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  3. उन्मुक्त उड़ान की ख़्वाहिश को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी है आपने। मन न जाने क्या-क्या सोचता है ... पर काश ... को वे पूरे हो जाते!!

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  4. Baadlon ke saath Udna .... Hawa ke saath gungunana .... Chandani ki tarah Ithalaanaa ... wah kitanii sundar Upmaa di hain .... saare sapne usel diye aapne ... bahut sundar rachna

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  5. शब्दों के संग भावनाओं की सुन्दर काल्पनिक उड़ान सुमन जी.

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    http://www.manoramsuman.blogspot.com
    http://meraayeena.blogspot.com/
    http://maithilbhooshan.blogspot.com/

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  6. बहुत खूबसूरती के साथ शब्दों को पिरोया है इन पंक्तिया में आपने

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  7. अद्भुत अभिव्यक्ति है| इतनी खूबसूरत रचना की लिए धन्यवाद|

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  8. काश ....यह ख्वाहिश पूरी होती .... कल्पना कि उड़ान ही भर लीजिए ... अच्छी प्रस्तुति

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  9. suman ji
    sabse pahle aapko hardik badhai mera sa samarthan kar mera utsah badhane ke leye.
    aapkisawan par ati manoram rachna bahut bahut hi
    pyari lagi.har panktitan lajwab
    bahut bahut badhi
    poonam

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  10. kash aisa hota to ek kaviyatri ka post nahi dikhta..............kyonki wo to pariyon ki tarah udte rahti:)
    behtareen!

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  11. इस काश का कोई अन्त नही मगर यही आगे बढने की प्रेअरण भी देती है। सुन्दर रचना। बधाई।

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  12. सुमन जी काश ..ऐसा होता उड़ सकती मै भी खुले आसमां में ..पंख फैलाइए कम से कम उडान तो हम भर ही सकते हैं कल्पना में पर लगा के ...
    सुंदर रचना कोमल भाव
    बधाई हो
    शुक्ल भ्रमर ५
    बाल झरोखा सत्यम की दुनिया

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  13. आपकी पोस्ट की चर्चा सोमवार १/०८/११ को हिंदी ब्लॉगर वीकली {२} के मंच पर की गई है /आप आयें और अपने विचारों से हमें अवगत कराएँ /हमारी कामना है कि आप हिंदी की सेवा यूं ही करते रहें। कल सोमवार को
    ब्लॉगर्स मीट वीकली में आप सादर आमंत्रित हैं।

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  14. प्रिय सुमन 'मीत' जी
    सादर सस्नेहाभिवादन !

    काश ऐसा होता… काश … इस काश के सहारे मन जितनी उड़ानें भरता है , उपलब्धियां हासिल करता है … उनकी आनन्दानुभूति अलग ही है … :)

    बहुत सुंदर भावों की इस रचना के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं !
    मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ


    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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  15. सच, ऐसी रचनाएं कभी कभी पढने को मिलती हैं।
    बहुत सुंदर

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  16. काश ऐसा होता ... मैं भी लिख पाता ... आपकी तरह ... बेहतरीन !

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  17. खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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