शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

मेरे हिस्से का सामान.......












पूनम सी गुजरे तेरी हर रात
मेरे हिस्से में ही अमावस आये

चाँदनी खिड़की से झांके रात भर
मेरे हिस्से में ही काले बादल आए


मदमाती पवन सहलाए तुम्हें
मेरे हिस्से में ही तूफान आए

तारों का गुलिस्ताँ बने बिछौना तेरा
मेरे हिस्से में ही अंधियारे काँटें आए

तू सोए हमेशा एक सुख भरी नींद
मेरे हिस्से में तेरे सब रतजगे आए......

   

                           सुमन 'मीत' 

27 टिप्‍पणियां:

  1. समर्पण का उत्कर्ष झलकता है आपकी पंक्तियों में।

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  2. bahut sundar nazm suman .. badhayi

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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  3. यह सब किस्मत का खेल है खुबसूरत अहसास , मुबारक हो

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  4. हकीकत है दर्द को लबादा ओढा शब्दों का और गहरा कर दिया,
    घुट-घुट कर सिसकियाँ भर रहा था दिल में आज आजाद कर दिया |

    दर्द को सुंदर,सटीक शब्दों का परिधान पहना हमसे पहचान करने के लिए धन्यवाद |

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  5. दर्द को लबादा ओढा शब्दों का इस तरह बयान करना,आपकी सशक्त्त लेखनी का परिचय देता है |

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  6. बहुत ही कोमल भावनाओं में रची-बसी खूबसूरत रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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  7. अच्ची रचना है जी!
    --
    अन्ना जी को ताकत देना, लोकपाल को लाने की।
    आज जरूरत है जन-जन के सोये सुमन जगाने की।।

    आँखे करके बन्द चमन के माली अलसाये हैं,
    नौनिहाल पादप जीवन की बगिया में मुर्झाये हैं,
    आज जरूरत है धरती में, शौर्य बीज उपजाने की।

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  8. बहुत भावप्रणव रचना लिकी है आपने!
    --
    अन्ना जी को ताकत देना, लोकपाल को लाने की।
    आज जरूरत जन-गण-मन के सोये भाव जगाने की।। http://uchcharan.blogspot.com/2011/08/blog-post_19.html

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज शनिवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  10. वाह ...बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

    वाह बहुत ही सुन्दर
    रचा है आप ने
    क्या कहने ||

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  11. बहुत सुन्दर भाव भरे हैं हर पंक्तियों में...
    सादर बधाई...

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  12. सुंदर प्रस्तुति,दिल में उतर गई...

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  13. बहुत ही सार्थक प्रस्तुति /अपने साथी के हर सुख की कामना और अपने हिस्से में उसके सारे दुःख लेने का अहसास कराती हुई बहुत ही सुंदर प्रस्तुति /शानदार अभिब्यक्ति के लिए बधाई आपको /
    आप ब्लोगर्स मीट वीकली (५) के मंच पर आयें /और अपने विचारों से हमें अवगत कराएं /आप हिंदी की सेवा इसी तरह करते रहें यही कामना है /प्रत्येक सोमवार को होने वाले
    " http://hbfint.blogspot.com/2011/08/5-happy-janmashtami-happy-ramazan.html"ब्लोगर्स मीट वीकली मैं आप सादर आमंत्रित हैं /आभार /

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  14. पी लिया है फिर किसी ने जहर सारा
    फिर मसीहा कोख में पलने लगा है
    जिसको हमने खेल समझा वा उखाड़ा
    आम वह फिर जम गया फलने लगा है

    सुमन जी!
    दूसरों के लिए दर्द और मुसीबत सहने का यह जज्बा सलाम के काबिल है

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  15. सच्चा प्यार करने वाला हमेशा क़ुरबानी देता है ... सुन्दर रचना !

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  16. अमावस , काले बादल , तूफ़ान , अंधियारे , रतजगे
    ग़म और दुख की हर चीज़ अपने लिए मांग कर
    अपने प्रिय के लिए सुख और ख़ुशी देने की भावना बहुत प्रभावित करती है …
    आभार और बधाई इस रचना के लिए सुमन जी !



    आपको सपरिवार
    नवरात्रि पर्व एवं दुर्गा पूजा की बधाई-शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं !

    -राजेन्द्र स्वर्णकार

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