शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

मेरे हिस्से का सामान.......












पूनम सी गुजरे तेरी हर रात
मेरे हिस्से में ही अमावस आये

चाँदनी खिड़की से झांके रात भर
मेरे हिस्से में ही काले बादल आए


मदमाती पवन सहलाए तुम्हें
मेरे हिस्से में ही तूफान आए

तारों का गुलिस्ताँ बने बिछौना तेरा
मेरे हिस्से में ही अंधियारे काँटें आए

तू सोए हमेशा एक सुख भरी नींद
मेरे हिस्से में तेरे सब रतजगे आए......

   

                           सुमन 'मीत'