शनिवार, 9 नवंबर 2013

ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो ..














है वो ही मौसम
वही सज़र .. वही शाम
ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो .. 

है वो ही शाम की लाली 
नदी का ठहरा पानी  
वही किनारा और मैं
ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो ..

है वो ही प्यार की गहराई
एक साथ बुने सपने
वही सोच और मैं
ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो ..

है वो ही ये मेरी हथेली
तुम्हारा कोमल निर्मल स्पर्श
वही एहसास और मैं
ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो ..

है वो ही मौसम
वही सज़र .. वही शाम
ऐ मीत ! तुम याद आ रहे हो ..
             तुम याद आ रहे हो ........!!




सु..मन