शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

तब और अब









तब 

हल्का हल्का 
दर्द था 
छोटी छोटी 
ख़्वाहिशें थी ....

गहरा गहरा 
रिश्ता था 
महकी महकी 
आशाएं थी ..... 

भरा भरा 
दरिया था 
प्यासी प्यासी 
बारिशें थी ......














...अब 

अलग अलग 
रास्ता है 
भूली भूली 
यादें हैं .....

टूटा टूटा 
बन्धन है 
गुढ़ी गुढ़ी 
गांठें हैं .....

सूखा सूखा 
सावन है 
भरी भरी 
आँखें हैं ....... !!


सु..मन