गुरुवार, 16 अप्रैल 2015

हॉट स्पॉट











चींटियों सी रेंगती है 
सीधी लाइन में गाड़ियाँ 
मशीन से दौड़े जाते हैं लोग 
रहता है मोबाईल 
24*7 ऑलवेज़ ऑन 
सजती हैं महफ़िलें 
हर रात ऑन टाईम 
खाली घर को ताकती हैं 
ऐ सी में बंद खिड़कियाँ 
खुला आकाश रखता है 
सबको पूरा दिन हॉट 
पार्सल में लिपट कर 
खाना बजाता है डोर बैल 
शाम ढले टेरिस पर 
झूला झूलते हैं कुछ बेजान पौधे
इक शहर का व्यस्त जीवन 
यूँ हॉट स्पॉट बन जाता है !!



सु-मन 

13 टिप्‍पणियां:

  1. महानगरों की ज़िंदगी का पूरा खाका खींच दिया है आपने इस रचना में ! सजीव चित्रण !

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  2. भाग दौड़ की शहरी जिन्दगी की सच्चाई को बयान करती खूबसूरत रचना ।

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  3. भाग दौड़ की शहरी जिन्दगी की सच्चाई को बयान करती खूबसूरत रचना ।

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  4. भाग दौड़ की शहरी जिन्दगी की सच्चाई को बयान करती खूबसूरत रचना ।

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  5. आज के महानगरों की ज़िंदगी का सटीक चित्र...

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  6. महानगरों की जिंदगी का यही सच है. हम सब बस झूला झूलते रहते हैं.

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  7. yahi jeevan hai ....ab yahi achha bhi lagta hai ....man ko bheetr udas bhi karta hai ....

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  8. बहुत खूब..!!

    इस दौर ने कुछ दुरिया कम करी हैं,तो बहुत फासले खड़े कर दिए हैं

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  9. शहरी जिंदगी को बढ़िया शब्द दिए हैं आपने सुमन जी

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  10. दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों
    बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.

    उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है
    समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं

    बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी ...बेह्तरीन अभिव्यक्ति ...!!शुभकामनायें.

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