मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

वो लड़की ~2











वो लड़की
सफ़र में
जाने से पहले
बतियाती है
आँगन में खिले
फूल पत्तों से
देती है उन्हें हिदायत
हमेशा खिले रहने की
रोज़ छत पर
दाना चुगने आई
चिड़िया को
दे जाती है
यूँ ही हर रोज़
आते रहने का न्योता
चाहती है वो
माँ का घर हरा – भरा
.
.
घर से निकलते वक़्त
टेकती है सर
घर की देहड़ी पर
बिना पीछे मुड़े
बढ़ा देती है कदम आगे
हर जरूरी सामान
छोड़ जाती है
पीछे ही घर में
एक छोटी डायरी में
लिख जाती है
सारा हिसाब किताब
माँ को दे जाती है
जल्दी लौट आने का
झूठा दिलासा
वो लड़की अंतिम सफ़र पर है !!


सु-मन 

सोमवार, 12 दिसंबर 2016

वो लड़की ~ 1










वो लड़की
रोटी सेंकते हुए
नहीं मिटने देना चाहती
अपने हाथों में लगी
नेलपॉलिश
चिमटे से पकड़ कर
गुब्बारे सी फूलती रोटी
सहेज कर रख लेती
कैसरोल में
नहीं माँजना चाहती
सिंक में पड़े जूठे बर्तन
गुलाबी रंगे नाखूनों से
नहीं उतरने देना चाहती
सुर्ख रंगत
.
.
पर कुछ ही देर बाद
अपनी इस चाहत को
दरकिनार कर
बेपरवाह हो
मांजने लगती है
बर्तन का ढेर
ये समझकर कि
नहीं रहती कोई भी चीज
हमेशा बरकरार
फूली रोटी के पिचकने की तरह
वो लड़की बेलन सी घुमावदार है !!


सु-मन