Click here for Myspace Layouts

सर्वाधिकार सुरक्षित

सर्वाधिकार सुरक्षित @इस ब्लॉग पर प्रकाशित हर रचना के अधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं |

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

दीप प्रदीप




मैंने दीया जला कर 
कर दी है रोशनी ...
तुम प्रदीप्त बन   
हर लो, मेरा सारा अविश्वास |

मेरे आराध्य !
आस के दीये में 
बची रहे नमी सुबह तलक ||


सु-मन 

दीप पर्व मुबारक !!

बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

गुनगुने दिन






















गुनगुने से हैं दिन अब 
रातें अधठंडी
मौसम के लिहाफ में 
शरद लेने लगी है करवट ||

सु-मन