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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

प्रेम















प्रेम !
हर दिन का उजाला
हर रात की चाँदनी
हर दोपहर की तपिश
हर शाम की मदहोशी

तुम्हें एक दिन में समेट पाऊं
इतनी खुदगर्ज़ नहीं .....

मेरे प्रिय !
तुम्हें चिन्हित
तुम्हारा ये दिन
तुम्हें बहुत बहुत मुबारक !!


सु-मन