सोमवार, 12 जुलाई 2010

भूली याद




















बढ़ गया दायरा जब तन्हाई का या रब
तू भी बदल गया एक बेवफा की तरह ;

डाला था हमने खुद को तेरी पनाह में
ठूकरा दिया तूने भी एक इंसान की तरह ;

क्या करें शिकवा क्या शिकायत किसी से
तू तन्हा छोड गया एक मुसाफिर की तरह ;

रूह-ए-सकूं मांगा था तेरी निगेहबानी में
दगा दिया तूने भी एक अजनबी की तरह ;

अब तो है शब-ए-गम , तड़प और टूटे ख़ाब
तू आ जाता है कभी सामने एक याद की तरह !!

              ................................
                                                             सु..मन 




अर्पित 'सुमन'--------नई चेतना

24 टिप्‍पणियां:

  1. वाह वाह वाह....क्या गज़ब लिख डाला..
    बस यूं लगा की मेरे ही दिल की सी बात कह दी...
    जितनी तारीफ करूँ कम है..
    तुम बहुत अच्छा लिखती हो.
    बधाई.

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  2. क्या करें शिकवा क्या शिकायत किसी से
    तू तन्हा छोड़ गया एक मुसाफ़िर की तरह
    वाह...बहुत खूब.
    एक शेर सुनिए
    क्या शिकायत क्या गिला तकदीर से
    बे-सबब रूठे रहे तकदीर से.

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  3. बढ गया दायरा तन्हाई का या रब
    तू भी बद्ल गया बेवफा की तरह
    तन्हाई है ही ऐसी शै कि हर कुछ बदला बदला सा नज़र आता है
    बहुत सुन्दर रचना

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  4. रूह-ए-सकूं मांगा था
    i think it should be rooh-e-sukun

    nice
    i felt through

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  5. क्या करें शिकवा क्या शिकायत किसी से
    तू तन्हा छोड़ गया एक मुसाफ़िर की तरह
    अच्छी पोस्ट,बेहतरीन रचना

    यह पोस्ट ब्लाग4वार्ता पर भी है

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  6. बहुत ही ख़ूबसूरती से पेश किया है आपने ख़ुदा से अपनी शिकायत। आनंद आ गया पढ़कर।

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  7. डाला था हमने अपने को तेरी पनाह में
    ठुकरा ही दिया तूने भी इंसान की तरह ।

    वाह क्या ख्याल ...और यह इंसानों पर ,उनकी इंसानियत पर एक करारा आघात
    अच्छी गजल ,बधाई सुमन गीत जी

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  8. ???????????? comment if approved please inform if possible--at

    rkramarya@gmail.com,

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  9. बढ गया दायरा तन्हाई का या रब
    तू भी बद्ल गया बेवफा की तरह

    बहुत सुन्दर....।

    डाला था हमने अपने को तेरी पनाह में
    ठुकरा ही दिया तूने भी इंसान की तरह ।

    क्या बात है ......!!

    बढ गया दायरा तन्हाई का या रब
    तू भी बद्ल गया बेवफा की तरह

    बहुत खूब ......बहुत ही उम्दा ग़ज़ल .....!!

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  10. yaade hai hi dard ke liye , in yaado ka koi kya kare.. aapne apne zazbaato ko shabd diye hai .. wo anupam hai

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  11. bahut sundar....
    bahut sundar....
    bahut sundar....
    aur kya kahun, waahhhhhhh.........

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