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मंगलवार, 20 अक्टूबर 2015

मंगलवास
















माँ !
जलाया है मैंने
आस्था की डोरी से
अखंड दीप
तुम्हारे चरणों में
किया है अर्पित
मुखरित सुमन
मस्तक पर लगा कर
चन्दन टीका
किया अभिषेक तुम्हारा
ओढ़ाई तारों भरी चुनरी
रोपा है मैंने
आस का बीज
हाथ जोड़
किया तुम्हारा वन्दन
पढ़ा देवी पाठ
की क्षमा प्रार्थना
फल नैवेद्य कर अर्पण
किया तुम्हारा गुणगान
हे माँ !
कर अनुग्रह मुझपर
करना फलीभूत मेरे उपवास 
रखना सदा अपना मंगलवास !!


सु-मन 

रविवार, 12 जनवरी 2014

माँ सुनो !
















(बेटी दिवस पर)

माँ सुनो !

जब पहली बार 
किया था महसूस 
अपने गर्भ में 
मेरा वजूद 
तो बताओ ना 
मेरी धड़कन में 
किसे जिया था तुमने 
एक बेटा या बेटी ।

जब कभी 
अकेले में बैठ 
करती थी मुझसे बात 
क्या कुछ पनपता था 
तुम्हारे भीतर 
एक बेटी की चाह
या बेटे का सपना ।

जब पहली बार 
गूँजी मेरी किलकारी 
लिया था अपने हाथों में 
तुम्हारी सोच की हकीकत को 
बताओ ना 
कैसे स्वीकारा था तुमने ।
.
.
.
तुम मौन हो माँ 
जानती हूँ तुम्हारी चुप्पी 
इतने बरस 
बेटी के वजूद को 
महसूस करती आई हूँ 
तुमसे होकर गुजरती 
तय कर रही हूँ 
तुम्हारे गर्भ से इस घर तक सफ़र !!

तुम्हारी बेटी


सु..मन

सोमवार, 12 अगस्त 2013

माँ (हायकु )










     
       १ 
माँ का हृदय 
करता इंतजार 
सूना आँगन |

      २ 
देख खिलौने 
झरते झर झर 
माँ के नयन |

      ३ 
कोख है खाली 
दर दर भटकी  
माँ की ममता |

      ४ 
बेसहारा माँ 
ताने कई हज़ार 
कोख में बेटी |

      ५ 
जाया पेट का 
जाता अकेला छोड़ 
अंतिम यात्रा |



सु..मन 
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