@सर्वाधिकार सुरक्षित

सर्वाधिकार सुरक्षित @इस ब्लॉग पर प्रकाशित हर रचना के अधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं |

शनिवार, 24 नवंबर 2018

बेपर्दा रूहें





















जलते हैं ज़िस्म श्मशानों में धुआँ धुआँ 
रूहें सर-ए-राह जब बेपर्दा हो निकलती हैं !!


सु-मन