Click here for Myspace Layouts

सर्वाधिकार सुरक्षित

सर्वाधिकार सुरक्षित @इस ब्लॉग पर प्रकाशित हर रचना के अधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं |

शुक्रवार, 4 जुलाई 2014

तब और अब









तब 


हल्का हल्का 

दर्द था 
छोटी छोटी 
ख़्वाहिशें थी ....

गहरा गहरा 

रिश्ता था 
महकी महकी 
आशाएं थी ..... 

भरा भरा 

दरिया था 
प्यासी प्यासी 
बारिशें थी ......














...अब 

अलग अलग 

रास्ता है 
भूली भूली 
यादें हैं .....

टूटा टूटा 

बन्धन है 
गुढ़ी गुढ़ी 
गांठें हैं .....

सूखा सूखा 

सावन है 
भरी भरी 
आँखें हैं ....... !!


सु..मन