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शनिवार, 20 अप्रैल 2013

ऐ मेरे नादान दिल












ऐ मेरे नादान दिलअब तो संभल जा
सच का सामना करसपनों को भूल जा

सेहरा-ए-जिंदगी है येगहरा सागर नहीं है
अनबुझी सी है प्यासन तू इसमें डूब जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो ....

सुलगती शमा है येसिंदूरी शाम नहीं है
पिघलता है जिस्म इसमेंन तू इसमें जल जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो .....

महफ़िल-ए-तन्हाई है येजश्न-ए-शाम नहीं है
तिश्नगी है जाम इसकान तू इसे पिए जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो .....

उल्फत का दरिया हैठहरा साहिल नहीं है
डूबते हैं अरमान इसमेंन तू इसमें बह जा

ऐ मेरे नादान दिलअब तो संभल जा
सच का सामना करसपनों को भूल जा !!


सु-मन