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बुधवार, 5 अगस्त 2015

स्मृतियों का आकाश















बाबुल !
स्मृतियों का आकाश
आज है भरा भरा
उड़ रहे तुम्हारे नेह के परिंदे
मैं जमीन पर खड़ी
देख रही तुम्हारी काल्पनिक छवि
तुम हो
दूर ..बहुत दूर
पर तुम्हारा एहसास
आज भी जीवंत है
मेरी रूह में
देता है मुझे शुभ आशीष
जीवन के हर पथ पर
चलता है मुझ संग हर कदम
तुम हो और रहोगे
मेरे साथ अंतिम क्षण तक
मेरी रगों में दौड़ोगे लहू बन कर
देखोगे मेरी आँखों से
अपना मनचाहा आकाश
भरोगे उड़ान सपनों की
थाम कर मेरी बांह
उड़ा ले जाओगे मुझे
संग अपने
दूर क्षितिज़ के उस पार
दोगे मेरी कल्पनाओं को पंख !!

सु-मन


(आज बाबु जी को गुजरे 3 साल हो गए | कमी तो हर पल सालती है मन को पर उनका एहसास हमेशा है और रहेगा)

सोमवार, 4 अगस्त 2014

बाबुल..तेरे जाने के बाद

(आज पापा को विदा किए दो बरस हो गए ...ऐ बाबुल ! बहुत याद आता है तू ..)










बाबुल !
मौन हैं ये क्षण
पर भीतर
अंतर्द्वन्द गहरा
फैल रही
मानसपटल पर
सारी समृतियाँ
झर रहे हैं वो पल
आँखों से निर्झर
चल दिए थे
जब तुम
निर्वात यात्रा
छोड़ सारे बन्धन
... बीते दो बरस
माँ भी बदल गई
दिखती है उम्रदराज
हंस देती है बस
बच्चों की चुहल से
वैसे रहती है
चुपचाप |

देखो ! उस कोने में
बीजा था जो तुमने
प्यार का बीज
अब हरा हो गया है
एक डाली से
निकल आई हैं
और तीन डालियाँ
खिलते है सब मौसम
उसमें तेरे नेह के
अनगिनत 'सुमन'
माँ सींचती है उनको  
अपने हाथों से
करती है हिफाज़त
हर आँधी से
यही है उसके
जीने का सामान  
यही तेरी निशानी भी है !!



सु-मन 

शनिवार, 15 जून 2013

ऐ बाबुल बहुत याद आता है तू ...

(पूज्य बाबू जी को समर्पित )















छोड़ इस लोक को ऐ बाबुल
परलोक में अब रहता है तू

कैसे बताऊं तुझको ऐ बाबुल
मेरे मन में अब बसता है तू

बन गए हैं सब अपने पराये
न होकर कितना खलता है तू

देख माँ की अब सूनी कलाई
आँखों से निर्झर बहता है तू

पुकारे तुझको ‘मन’ साँझ सवेरे
मंदिर में दिया बन जलता है तू  

ऐ बाबुल बहुत याद आता है तू....
ऐ बाबुल बहुत याद आता है तू..... !!


सु..मन

रविवार, 17 जून 2012

ऐ बाबुल


















बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही  
मत तोड़ मुझे डाली से
खिलने दे अपनी बगिया ही …….

बेटा बनकर तुझको संभालूं
बुढ़ापे का बनूँगी सहारा भी
कभी न छोडूंगी तेरा दामन
आँखें बन करुँगी उजियारा भी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही......

रिश्ते जहाँ में झूठे हैं सारे
नहीं और रिश्ता तुझसा कोई
क्यूँ कहें दुनिया मोहे ऐ बाबुल
बेटी जैसा बोझ ना दूजा कोई

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.....

माँ की लोरी याद है आती
वो मुझको सहलाती बाहें तेरी
पुकारे मुझको घर का आँगन
ये महकती हुई फुलवारी तेरी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.......

बचपन में तूने थामा हाथ मेरा
अब तुझको ना गिरने दूंगी कभी
समय को बदलने दे अपने तेवर
तू डर मत मैं न बदलूंगी कभी

बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही.....

कभी ना भटकूंगी कर्म पथ पर
हर मुश्किल से लड़ लूंगी मैं भी
आशीष तेरा रहे सदा मुझ पर  
बस इतना कर्म करना तू भी


बाबुल मोहे रहने दे
अपनी प्यारी बिटिया ही
मत तोड़ मुझे डाली से
खिलने दे अपनी बगिया ही........!!




                                     


  सु ..मन 
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