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बुधवार, 18 अक्टूबर 2017

दीप प्रदीप




मैंने दीया जला कर 
कर दी है रोशनी ...
तुम प्रदीप्त बन   
हर लो, मेरा सारा अविश्वास |

मेरे आराध्य !
आस के दीये में 
बची रहे नमी सुबह तलक ||


सु-मन 

दीप पर्व मुबारक !!

बुधवार, 11 नवंबर 2015

आओ दीप जलायें















आओ दीप जलायें 
देहरी में मंगल का 
आँगन में सुख का 
कमरे में शान्ति का 
खिड़की में आस का 
बरामदे में ख़ुशी का 
मंदिर में भक्ति का 
दिल में उमंग का 
प्रेम के हर रंग का 
आओ दीप जलायें 
आओ दीप जलायें !!


दीप पर्व मुबारक ...

सु-मन 

बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

प्रेम का नव दीपक



जिंदगी की दीवार पर
चिन्हित हैं उम्र के झरोखे  
जलाना तुम हर बरस
प्रेम का नव दीपक
डालना सदभावना की डोरी
भरकर करुणा का भाव
प्रदीप्त करना मंगलकामना की लौ !!


( दीवार पर चिन्हित झरोखों में उम्र भर का सामान है ..फिर भी खाली प्रतीत होते हैं ... भरा हुआ खालीपन नहीं दिखता ना.. देखो न ! प्रेम खालीपन में समाहित हो कितना जगमगाने लगा है !! )
 दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें ..... 

सु-मन

रविवार, 3 नवंबर 2013

जल रहे हैं दीपक













जल रहे हैं दीपक 

सबके आँगन 
चल रहे हैं 
पटाखे फुलझडियाँ 
सज रहे हैं द्वार 
लक्ष्मी के स्वागत में ...

ये देखते हुए 

जलाया है किसी ने 
पिछले बरस खरीदा 
अधटूटा सा दीपक 
घर के द्वार पर 
तुम्हारे लिए .....

रखी है उसने 

अपने हिस्से की 
एक पूरी कुछ हलवा 
मिला है जो उसको 
आज सुबह 
एक मंदिर के बाहर 
भीख के कटोरे में .....

सोच में हूँ 

क्या आओगी तुम 
उस द्वार 
या जलेगा वो दीपक 
फिर तन्हा 
यूँ ही अगले बरस...... !!



सु..मन 

(हे माँ ! सभी की झोली खुशियों से भर दो ...सभी को दीपावली की मंगलकामनाएं ...) 

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