कुछ क़तरे हैं ये जिन्दगी के.....जो जाने अनजाने.....बरबस ही टपकते रहते हैं.....मेरे मन के आँगन में......
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बुधवार, 18 अक्टूबर 2017
बुधवार, 11 नवंबर 2015
बुधवार, 22 अक्टूबर 2014
प्रेम का नव दीपक
जिंदगी की दीवार पर
चिन्हित हैं उम्र के झरोखे
जलाना तुम हर बरस
प्रेम का नव दीपक
डालना सदभावना की डोरी
भरकर करुणा का भाव
प्रदीप्त करना मंगलकामना की लौ !!
( दीवार पर चिन्हित झरोखों में उम्र भर का सामान
है ..फिर भी खाली प्रतीत होते हैं ... भरा हुआ खालीपन नहीं दिखता ना.. देखो न ! प्रेम खालीपन में समाहित हो कितना जगमगाने लगा है !! )
दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें .....
सु-मन
सु-मन
रविवार, 3 नवंबर 2013
जल रहे हैं दीपक
जल रहे हैं दीपक
सबके आँगन
चल रहे हैं
पटाखे फुलझडियाँ
सज रहे हैं द्वार
लक्ष्मी के स्वागत में ...
ये देखते हुए
जलाया है किसी ने
पिछले बरस खरीदा
अधटूटा सा दीपक
घर के द्वार पर
तुम्हारे लिए .....
रखी है उसने
अपने हिस्से की
एक पूरी कुछ हलवा
मिला है जो उसको
आज सुबह
एक मंदिर के बाहर
भीख के कटोरे में .....
सोच में हूँ
क्या आओगी तुम
उस द्वार
या जलेगा वो दीपक
फिर तन्हा
यूँ ही अगले बरस...... !!
सु..मन
(हे माँ ! सभी की झोली खुशियों से भर दो ...सभी को दीपावली की मंगलकामनाएं ...)
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