शुक्रवार, 17 सितंबर 2010

अहसास

अहसास


एक अबोध शिशु
माँ के आँचल में
लेता है जब
गहरी नींद
माँ उसको
अपलक निहारती
बलाऐं लेती
महसूस है करती
अपने ममत्व को
                  वो आगाज़ हूँ मैं .........

विरह में निष्प्राण तन
लौट है आता
चौराहे के छोर से
लिये साथ
अतीत की परछाई
भविष्य की रुसवाई
पथरीली आँखों में
सिवाय तड़प के
कुछ नहीं
          वो टूटन हूँ मैं ...........

कोमल हृदय में
देते हैं जब दस्तक
अनकहे शब्द
उलझे विचार
मानसपटल पर
करके द्वन्द
जो उतरता है
लेखनी से पट पर
                     वो जज़्बात हूँ मैं .........

थकी बूढ़ी आँखें
जीवन की कड़वाहट का
बोझ लिए
सारी रात खंगालती हैं
निद्रा के आशियाने को
या फिर
बाट जोहती हैं
अपने अगले पड़ाव का
                    वो अभिप्राय हूँ मैं ...........




वो आगाज़ में पनपा
                      टूटन में बिखरा
                                    जज़्बात में डूबा
                                                      अभिप्राय में जन्मा
                                                                                      ‘अहसास’ हूँ मैं !!
                     
                                                                                     

                                                                                                                                  सुमन मीत

34 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत बातें। क्या क्या हूं मैं। हर आने वाली उम्मीद हूं। हर निराशा के बाद हताशा के बाद....का हर पड़ाव मैं हूं। खूबसूरत एहसास।

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  2. aur suman ji...mere blog ka raasta yaad karein paas mein hi hai.....
    hahaha.....

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  3. अति-सुन्दर--परंतु पूर्णता इस तरह दीजाय तो ....

    "...कर्तव्य पथ पर चलकर
    अन्तिम समय,
    अपने चारों ओर खडे,
    परिजनों को देख
    सफ़ल व भरपूर जीने का
    अहसस लिए,
    ---एक जीवन हूं में ॥

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  4. बहुत अच्छे शब्दों में प्रस्तुत किये गए एहसास.

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  5. Dear Suman,

    Bahut hi khatta meetha jeevan ka ehsaaas hai ye......

    ati sundar....

    rashmi

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  6. लयबद्ध होते भावों के स्वर, एक के बाद एक।

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  7. गुप्ता जी ......आपने बहुत ही सुन्दर पंक्तियां लिखी हैं .....ये अंत भी बहुत सुन्दर होगा........एक आशावादी अंत.........

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  8. वाह क्या बात है...कलम की धार बहुत तेज हो गयी है...सुंदर अति सुंदर अभिव्यक्ति.

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  9. वाह! क्या बाथै!! अहसास को शब्दों का बढिया जामा पहनाया है।

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  10. बहुत सुन्दर भाव....
    जिस ढंग से एहसासों को शब्द दिए है वो तारीफ के योग्य हैं....और चित्र तो इन्ही शब्दों के लिए बने हैं....बहुत उम्दा..

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  11. सचमुच एक सुन्दर और पवित्र एहसास है

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  12. बहुत गहरी ... बहुतर संवेदनशेल रचना है .... शब्दों की जादूगरी ..... कमाल का लिखा है सुमन जी ....

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  13. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी रचना 22 - 9 - 2010 मंगलवार को ली गयी है ...
    कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  14. ख़ूबसूरत बिम्ब, सुन्दर समापन, अच्छा लगा पढना इसे

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  15. कल गल्ती से तारीख गलत दे दी गयी ..कृपया क्षमा करें ...साप्ताहिक काव्य मंच पर आज आपकी रचना है


    http://charchamanch.blogspot.com/2010/09/17-284.html

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  16. आपका यह ब्लोग भी शानदार है !
    रचना भी वज़नदार है !\बहुत कुछ तो पढ़ ही गया हूं !
    फ़िर-फ़िर आउंगा !
    फ़िलहाल अछे ब्लोग व अच्छी रचनाओं के लिए बधाई !

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  17. आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया............

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  18. ...अहसास....दिल में छुपी भावनाओं का ज्वार यानि कविता की तमाम शर्तों को पूरा करती कविता, मनभावों का ना तो कोई वेष होता है...ना उम्र की परिधी से कोई संबंध ...आपकी कविता का आवेग..सब कुछ दर किनार करता...सिर्फ़ और सिर्फ़ अभिव्यक्ति को सशक्त करता लगा.शुभकामनाएं

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