शुक्रवार, 6 जून 2014

ये एक गरम दिन था











ये एक गरम दिन था
जिसमें सूरज ने उड़ेल दिया
अपना सम्पूर्ण प्रेम
और धरा
उस प्रेम में तप कर
निर्वाक जलाती रही खुद को
आँख मिचे |

ये एक गरम दिन था
जिसमें नदी खुद पीती रही
अपना पानी
किनारे की रेत
प्रेम की प्यास में जलकर
अतृप्त शिलाओं के बाहुपाश में
देखते रही इकहरी होती नदी को
टकटकी लगाए |

ये एक गरम दिन था
जिसमें हरे वृक्ष पड़े थे
औंधे मुँह
मक्की बीजे खलिहानों में  
अंकुर ले रहा था
नवजीवन की अनमोल साँसें
पवन चक्की मांग रही थी
हिमालय से अपने हिस्से की
कुछ हवा |

ये एक गरम दिन था
जिसमें जीवन था..अनगिनत साँसें थी !!


सु..मन 

22 टिप्‍पणियां:

  1. ये एक गरम दिन था
    जिसमें जीवन था..अनगिनत साँसें थी ......बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ

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  2. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन मिलिए १६ वीं लोकसभा की नई अध्यक्षा से - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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    1. आभार ब्लॉग बुलेटिन का | साथ बना रहे |

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  3. उस दिन में सब कुछ था....... गहरे भाव

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  4. सच ये गर्म दिन था...और तुमने लिखी नर्म सी कविता !!
    बहुत सुन्दर
    अनु

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    1. इस गर्म दिन के नर्म भावों को पढ़ने के लिए शुक्रिया आपका |

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  5. ये एक गरम दिन था जहां फूट रहे थे सृजन के अंकुर।

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  6. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (07-06-2014) को ""लेखक बेचारा क्या करे?" (चर्चा मंच-1636) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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    1. आभार शास्त्री जी | ब्लॉग जगत में आपका योगदान सराहनीय है |

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  7. mujhe ye din bahut pasand aaya . zindagi kee maang yahi hoti hia ki aise din mile !

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया विजय जी | बहुत दिनों बाद आपकी दस्तक हुई ..बहुत अच्छा लगा |

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  8. कल 08/जून/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
    धन्यवाद !

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  9. Nice one ma"m :)
    Just started my blog focusing on Hindi Stories and Hindi Poems based on present day human life.....
    Fire on Water
    please , have a look :)

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  10. सुबह सुबह मन प्रसन्न हुआ रचना पढ़कर !

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  11. सुन्दर कविता है...समय की मांग के मुताबिक.

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  12. बहुत खूबसूरत रचना .... बधाई !!

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