शुक्रवार, 9 अप्रैल 2010

याद आता है.............

याद आता है.......


याद आता है
वो माँ का लोरी सुनाना
कल्पना के घोड़े पर
परियों के लोक ले जाना
चुपके से दबे पांव
नींद का आ जाना
सपनों की दुनियाँ में
बस खो जाना ...खो जाना...खो जाना..................

याद आता है
वो दोस्तों संग खेलना
झूले पर बैठ कर
हवा से बातें करना
कोमल उन्मुक्त मन में
इच्छाओं की उड़ान भरना
बस उड़ते जाना...उड़ते जाना...उड़ते जाना.............

याद आता है
वो यौवन का अल्हड़पन
सावन की फुहारें
वो महका बसंत
समेट लेना आँचल में
कई रुमानी ख़ाब
झूमना फिज़ाओं संग
बस झूमते जाना...झूमते जाना...झूमते जाना............

याद आता है
वो हर खुशनुमा पल
बस याद आता है..............
                           याद आता है.............
                                               याद आता है................!!



सु..मन 

21 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर और अलग तरह की रचना है ... छंद्द को लेकर जो प्रयोग किये हैं वह सराहनीय है !

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  2. याद आता है -------
    किसी को ढूढते ढूढते खुद ही खो जाना

    वाह बहुत सुन्दर रचना लिखी है आपने

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  3. मनुष्य मन विचित्र है। समय सीपी से बाहर आ जाने पर मोतियों की स्मृति जागती है।

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  4. koi lauta de mujhko wo bachpan ka sawan vo kagaz ki kashti wo baarish ka paani............bahut sunder rachna hai apki!!!

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  5. यादों को खूबसूरती से सजाया है....बढ़िया रचना

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  6. बहुत खूब ....!!

    सच यौवन का अल्हड़पन किसे याद नहीं आया .....!!

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  7. यादें यादें यादें ... ये यादें न हों तो जीना आसान नही ...
    बहुत अच्छा लिखा है ...

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  8. हाँ सच हमें भी कुछ-कुछ...अरे नहीं-नहीं बहुत कुछ याद आ गया....और बहाना बनी आपकी यह कविता....अगर जो अच्छी ना होती तो याद भी कुछ नहीं आता....हाँ सच.....

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  9. सच लिखा है आपने यादें चाहे बचपन की हों या यौवन के अल्हड़पन की ---सभी हमें जीवन में हर समय सुखद अहसास कराती हैं---अच्छी रचना।

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  10. aapne to saare jeevan ka saar hi de diya is kavita me ,jeevan ke ant me hi sab kuch yaad nahi aata hai ,kabhi kabhi madhya me bhi zindagi ruk kar poochti hai hamse .....badhayi sweekar kariye ..

    aabhar aapka

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  11. बहुत खूब ....!!

    सच यौवन का अल्हड़पन किसे याद नहीं आया .....!!

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