कुछ क़तरे हैं ये जिन्दगी के.....जो जाने अनजाने.....बरबस ही टपकते रहते हैं.....मेरे मन के आँगन में......
अनमने से हैं दिन अब रातें हैं बेचैन बिस्तर के लिहाफ में ख्वाब लेते हैं करवटें.
बहुत खूब !!
सुन्दर!
बेहद सुंदर भाव ,मन में उतर गए ।
आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 12-10-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2755 में दिया जाएगा धन्यवाद
बहुत सुन्दर ..
अचानक एक दिन शॉल की जरुरत महसूस होने लगेगी
अनमने से हैं दिन अब
जवाब देंहटाएंरातें हैं बेचैन
बिस्तर के लिहाफ में
ख्वाब लेते हैं करवटें.
बहुत खूब !!
जवाब देंहटाएंसुन्दर!
जवाब देंहटाएंबेहद सुंदर भाव ,मन में उतर गए ।
जवाब देंहटाएंआपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 12-10-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2755 में दिया जाएगा
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
बहुत सुन्दर ..
जवाब देंहटाएंअचानक एक दिन शॉल की जरुरत महसूस होने लगेगी
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