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सोमवार, 24 जून 2019

यादें कभी बंजर नहीं होती




इस दफ़ा शब्दों के मानी बदल गए
नहीं उतरे कागज़ पर , तकल्लुफ़ करते रहे

वक़्त के हाशिये पर देता रहा दस्तक
अनचिन्हा कोई प्रश्न, उत्तर की तलाश में
कागज़ फड़फड़ाता रहा देर तक
बाद उसके, थोड़ा फट कर चुप हो गया

आठ पहरों में बँटकर चूर हुआ दिन
टोहता अपना ही कुछ हिस्सा वजूद की तलाश में

एक सिरकटी याद का ज़िस्म जलता रहा
सोच के दावानल में धुआँ धुआँ
जिंदगी दूर बैठ उसे ताकती रही, अपलक
सुलगती रही बिन आग, याद के साथ साथ !!

दरअसल -
वक़्त दिन तारीख नहीं होते एक दूसरे से जुदा
शब्द ढूँढ ही लेते रास्ता कागज़ पर उतरने का
यादें कभी बंजर नहीं होती जिंदगी के रेगिस्तान में !!

सु-मन

बुधवार, 1 मई 2019

बर्ग-ए-चिनार










चुरा लाई हूँ तुम्हें
तुम्हारे दरख़्त से
रख दिया है सहेज के
अपनी नज़्मों के पास
बहुत ख़्वाहिश थी
बिताऊँ चन्द लम्हें
तुम्हारे आगोश में
डल के किनारे बैठ
करूँ हर शाख से बातें
महसूस करूँ तुम्हारा वजूद
उतार लूँ तुमको मन के दर्पण में
ये सोच-
ले आई तुम्हें अपने साथ
कि मेरी हर नज़्म अब बर्ग-ए-चिनार होगी ।।


सु-मन
#कश्मीर डायरी 

बुधवार, 20 मार्च 2019

गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

मातृभाषा


















भाषाएँ कहलाती जीवन
जीवन में फिर होता सृजन 

सृजन से उपजता है ज्ञान
ज्ञान से परिभाषित हो विज्ञान 

विज्ञान से बदलता परिवेश
परिवेश बनाता प्रगतिशील देश

देश की होती अपनी परिभाषा
परिभाषा में अहम होती भाषा

भाषा जिसमें लगी है बिंदी 
बिंदी की सुर्खी से सजी हिंदी 

हिंदी प्रिय भारत की मातृभाषा 
मातृभाषा वंदन हमारी अभिलाषा !!


अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की शुभकामनाएँ |


सु-मन 

शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2019

उड़ी या पुलवामा















         १.
आतंकी वार 
उड़ी या पुलवामा 
कितनी बार ।

      २.
शहीद लाल 
दामन में लपेटे 
रोया तिरंगा ।

     ३.
टूटी चूड़ियाँ 
माँग बिन सिन्दूर 
वीर की बेवा |


14 फरवरी 2019 पुलवामा आंतकी हमला | शहीद जवानों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली ||


सु-मन 

रविवार, 30 दिसंबर 2018

जब आता है दिसम्बर






लम्बी सर्द रात में
ऊँघता है चाँद तन्हा
जर्द पत्तों को संभाले
ओढ़ लेते है दरख्त
सफेद चादर
जब आता है दिसम्बर....

धूप की मिन्नतें करते
नज़र आते हैं सुबह
ओस के मेहमान
क्यारी के बेफूल पौधे
होते हैं कुछ उदास
जब आता है दिसम्बर....

मक्की की रोटी
चूल्हे पर है पकती
क्या खूब होता जायका
सरसों के साग का
मक्खन चुपड़ के
खिलाती है माँ
जब आता है दिसम्बर....

बीते ग्यारह मास
करता हर कोई याद
क्या खोया और पाया
होता ये एहसास
बीती को बिसार कर
बढ़ता नव वर्ष की ओर
जब आता है दिसम्बर.... !!


सु-मन


#बारह_मास_नवम्बर

शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

जन्मदिन






















ऐ जिंदगी !
...जन्मदिन पर
कर दे कुछ हर्फ़ मेरे नाम
रख उन हर्फ़ों में
अश्क़ों सी ताज़गी
कलम के रंग को
कर दे लहू सा गूढ़ा लाल
भरते हर पन्ने में
डाल दे अंतिम श्वास का भाव
कि अनगिनत अनजीये लम्हों को
यादों की कब्र में सकून से दफना दूँ !!



सु-मन

मंगलवार, 27 नवंबर 2018

नवम्बर















नरम गरम धूप में
छत पर सुस्ताते हैं
सभी ख़्वाब

ठंडी रातों के
ओस भरे लिहाफ में
जब दुबक जाता है नवम्बर !!


सु-मन 

#बारह_मास








शनिवार, 24 नवंबर 2018

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