आया था जो कल रोजी की तलाश में वो आज दिल्ली शहर से कूच कर गया जाता था खाना लेकर रोज़ अपने काम पे वो शख्स आज रोटी का मोहताज़ हो गया पलता था जो परिवार एक ही कमाई से पैदल चल अपने गाँव खाली हाथ हो गया नहीं चिंता उसको किसी संक्रमण की फुटपाथ लाखों लोगों का घर बन गया स्तब्ध हूँ देख कर - 2 वक़्त के ये बदलते तेवर दिल्ली शहर का कैसा मंज़र बदल गया दिल्ली शहर का कैसा मंजर बदल गया ।।
सूने पड़े हैं आजकल नाना नानी के घर नहीं होती टीवी के रिमोट के लिए लड़ाई नानी सीख गई है वीडियो कॉल करना अपनी दिनचर्या की रिपोर्ट देती सारी बच्चे फ्लाईंग किस कर बोलते MISS U नानी जवाब में दुआएँ देती ढेर सारी बेटी दामाद बोलते घर में बोर हो गए माँ माँ घर से ना निकलने की देती हिदायतें भारी एक अलग सा निखार आ गया है रिश्तों में पूछते सब एक दूसरे का हालचाल और खुमारी कोरोना ने सीखा दिया जीवन का महत्व घर बना सुरक्षा कवच बाहर फैली है महामारी !! सु-मन
किवाड़ बंद हैं सब मन्दिर के हर ईश्वर लीन एकांतवास में जन कल्याण की खातिर कर रहा आराधना आदिशक्ति की आवाहन माँ गौरी का करके प्रकृति स्वरूपा का कर रहा वन्दन
समझ गया है इंसान भी आंतरिक भक्ति का ज्ञान मान कर घर को ही मंदिर पढ़ रहा खुद देवी पाठ माँग रहा जीवन की रोशनी जला कर अखण्ड दीप
नवरात्रे में नहीं सजी दुकानें न ही लगी मंदिरों में कतारें न ही गूँजे माँ के जयकारे इस बरस- माँ ले रही भक्ति की परीक्षा !!
खींची आज जिसने लक्ष्मण रेखा घर के दरवाजे पर सबके हित के लिए वो खुद बेमिसाल बन गए लाँघ गए जो अपनी जिद की खातिर कुछ कदम न जाने कितनी जिंदगियों का आखिरी काल बन गए !!
होकर तेरा हिस्सा भी, तुझसे अलग सा था मैं आतंक के साये में, खुद अपनों से डरता था मैं चाह थी, हर जँजीर हट जाए फर्क और मज़हब की इसी आज़ादी के तिरंगे की, अभिलाषा करता था मैं !!
मन ! खुशी मुबारक | 1st अगस्त को iblogger द्वारा आयोजित Blogger of the Year 2019 Contest के परिणाम की घोषणा की गई और Top 10 blogger of the year में अपना नाम दिखा तो मन खुश हो गया | सोचा आप सब से अपनी खुशी साझा कर लूँ , उन पाठकों से जिन्होंने मेरे लेखन को सराहा.. मेरे लफ्ज़ों को गति दी | विजेता , उपविजेता और सभी विजेताओं को शुभकामनाएं .... निर्णायक मण्डल और पाठकों का तहे दिल से शुक्रिया .. और मन ! मेरे हर लफ्ज़ , विचार और अभिव्यक्ति के रचयिता ..तुझे प्यार भरी झप्पी :-) सु-मन