त्रिवेणी
ठहर गई भागदौड़ भरी जिंदगी एक पल में
जंग बिना ही बंद हो गए सब दफ़्तर के ताले
शामें खुद मयखाने सी नशीली हो गयी है आजकल !!
सु-मन
पढ़ें ~ day 9
कुछ क़तरे हैं ये जिन्दगी के.....जो जाने अनजाने.....बरबस ही टपकते रहते हैं.....मेरे मन के आँगन में......
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| राम नवमी की शुभकामनाएँ |