शुक्रवार, 8 जून 2012

मन बावरा




















मन बावरा 
उड़ने चला 
पंख बिना 


टूटे पंख 
छूटे सपने                                    
बादल बरसे 


कलम भीगी 
लफ्ज़ पनपे 
नज्म उभरी !!








सु-मन 



13 टिप्‍पणियां:

  1. पंख के बिना उड़ान लंबी होगी
    बहुत खूब

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  2. बहुत ही बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग

    विचार बोध
    पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  3. इसी उड़ान से ही तो बेहतर नज़्म बनती है ..

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  4. बहुत बेहतरीन रचना....
    मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।

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  5. अच्छी लगी यह कविता। सु-मन को कविता से जोड़ कर पढ़ा।:)

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