सोमवार, 18 जून 2018

शब्द से ख़ामोशी तक – अनकहा मन का (१५)























तमाम खुशियों के बावजूद गम हरा है अभी

जिंदगी की सूखी सतह पर नमी बाकी है शायद ।।



सु-मन 











3 टिप्‍पणियां:

  1. ये नमी सूखने नहि देती ग़म की हरियाली ...
    गहरे शब्द ...

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सही
    थोड़ी सी नमी भी काफी होती है अंकुरण के लिए

    उत्तर देंहटाएं