मंगलवार, 29 मार्च 2011

तन्हा सी जिंदगी





















तन्हा सी इस जिंदगी को
         कोई सहारा तो चाहिए
दर दर भटकती रूह को
         कोई ठिकाना तो चाहिए
                   तन्हा सी..............

भंवर में घिरी कश्ती को
         कोई किनारा तो चाहिए
लहरों में फंसे मुसाफिर को
 तिनके का सहारा तो चाहिए
                    तन्हा सी..............

जीवन में आए सैलाब को
         थमने का भरोसा तो चाहिए
मन में उमड़े ख़यालों को
         सच होने का दिलासा तो चाहिए
                    तन्हा सी..............

आँखों में घिर आए बादलों को
         बहने का बहाना तो चाहिए
आस में डूबी इन निगाहों को
         मंजिल का नज़ारा तो चाहिए
                    तन्हा सी..............

हर पल मरती इन साँसों को
         जीने का सबब तो चाहिए
अंधियारे रास्तों पर बढ़ते कदमों को
         उजाले की आहट तो चाहिए
                    तन्हा सी..............

दिशाहीन दिमागी सोचों को
         दिशा की चाहत तो चाहिए
अंतरमन में उठते भावों को
         शब्दों की मिलावट तो चाहिए
                    तन्हा सी..............

खो ना जाऊँ दुनिया की भीड़ में तन्हा
         कुछ कदम तक साथ तो चाहिए
तेरे बिना मैं कुछ नहीं मालिक
         तेरे साथ की जरुरत तो चाहिए
                    तन्हा सी..............
                    तन्हा सी..............

                                            

                                                                                                     सु..मन 

20 टिप्‍पणियां:

  1. अंधियारे रास्तों पर बढ़ते क़दमों को
    उजाले की आहट तो चाहिए .....
    तेरे बिना मैं कुछ नहीं मालिक तेरे साथ की जरुरत तो चाहिए.... सत्य कहा आप ने इश्वर का साथ रहे तो अंधियारे रास्तों पर उजाले की आहट मिल ही जाएगी..
    सुन्दर कृति के लिए बधाइयाँ..

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  2. यूँ अकेले समय बिताना,
    कितना पीड़ाकारी है।

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  3. चाहिए तो बहुत कुछ पर मिलता कितना है यह देखने की बात है ...
    अच्छी प्रस्तुति

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  4. 'आंखों में घिर आए बादलों को बहने का बहाना तो चाहिए...'
    बेहतरीन रचना।
    अच्‍छे और गहरे भाव।
    शुभकामनाएं आपको।
    आप आमंत्रित हैं मेरे ब्‍लाग में एक दिलचस्‍प पोस्‍ट के लिए
    http://atulshrivastavaa.blogspot.com/2011/03/blog-post_26.html

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  5. बहुत सुन्दर गीत .... जिंदगी जीने का कुछ बहाना तो चाहिए ..तन्हा सी ...

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  6. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (31-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  7. हर पल मरती इन सांसों को, जीने का सबब तो चाहिए
    अंधियारे रास्ते पर बढ़ते क़दमों को, उजाले की आहट तो चाहिए
    बहुत सुन्दर रचना है, सुमन जी बधाई.

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  8. wonderful and heart touching it is !!!

    thanks to share this here,keep continue...

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