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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

प्रेम (अपरिभाषित)


प्रेम इतना विशाल होता है कि जिसको परिभाषित करना नामुमकिन है बिलकुल वैसे....जैसे इस असीमित आकाश को सीमा देना | ईश्वर की सबसे सुंदर कृति इन्सान और इंसान में धड़कता उसका कोमल ह्रदय ..उसमें बहता भावनाओं का दरिया ....और उन भावनाओं से उपजती प्रेम की अभिव्यक्ति......

प्रेम (अपरिभाषित)

सोचा लिखूं... मैं भी
प्रेम की परिभाषा
परिभाषित कर दूँ प्रेम
आज इस प्रेम दिवस पर  
पर ...
मेरे लिए
नहीं हैं प्रेम
मात्र एक दिन की सौगात
न ही
अभिव्यक्ति एक दिन की
मेरे लिए
हर पल है प्रेम
जिसमे सुनती हूँ
मौन तुम्हारा
देखती हूँ अपनी आँखों में
तुम्हारे कुछ बुने सपने
लफ़्ज़ों को देती हूँ
आकार तुम्हारा
सृजित करती हूँ
अपने भीतर
एक नई कोंपल
तुम्हारे नेह की
और
‘मन’ के दर्पण में
देखती हूँ
हर पल खिलता
एक ‘सु-मन’ !!




सु-मन 

37 टिप्‍पणियां:

  1. ये सु-मन खिला रहे .....:))

    बहुत सुंदर नज्म .....!!



    happy valentine day ...!!

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  2. सुंदर प्रस्तुति प्रेम किसी परिभाषा किसी वक्त का मोहताज नही बहुत बहुत बधाई

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  3. प्रेम को लेकर एक सुन्दर अभिव्यक्ति !

    उत्तर देंहटाएं
  4. अनुपम भाव संयोजन प्रेम है ही अपने आप एक ऐसा अपरिभाषित शब्द जिसे कभी शब्दों में परिभाषित किया ही नहीं जा सकता। क्यूंकि प्यार तो वो जज़्बा है दिल का जिसे सिर्फ रूह से महसूस किया जा सकता है। Wish you a very Happy valentine's day dear... :)

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  5. सुन्दर प्रस्तुति |
    आभार आदरेया ||

    गमन अनुगमन मन सुमन, मनसाता मनसेधु |
    सुम-सुमनामुख सुमिरते, मिले पुन्य मकु मेधु ||

    उत्तर देंहटाएं
  6. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

    उत्तर देंहटाएं
  7. लाज़वाब...बहूत ही उत्कृष्ट और प्रेरक अभिव्यक्ति..आभार

    उत्तर देंहटाएं
  8. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (16-02-2013) के चर्चा मंच-1157 (बिना किसी को ख़बर किये) पर भी होगी!
    --
    कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि चर्चा में स्थान पाने वाले ब्लॉगर्स को मैं सूचना क्यों भेजता हूँ कि उनकी प्रविष्टि की चर्चा चर्चा मंच पर है। लेकिन तभी अन्तर्मन से आवाज आती है कि मैं जो कुछ कर रहा हूँ वह सही कर रहा हूँ। क्योंकि इसका एक कारण तो यह है कि इससे लिंक सत्यापित हो जाते हैं और दूसरा कारण यह है कि किसी पत्रिका या साइट पर यदि किसी का लिंक लिया जाता है उसको सूचित करना व्यवस्थापक का कर्तव्य होता है।
    सादर...!
    बसन्त पञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सूचनार्थ!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  9. बहुत सुंदर!
    ऐसे ही खिलता रहे...महकता रहे ये प्रेम.....
    ~सादर!!!

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  10. बहुत सुन्दर रचना..प्रेम परिभाषित बना रहे।

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  11. ..प्रेम की परिभाषा लिखने बैठों तो समय का और शब्दों का बंधन त्यागना ही पडेगा!...बहुत गहन विषय है यह!...बहुत सुन्दर कृति,बधाई!

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    उत्तर
    1. बिल्कुल सही कहा अरुणा जी ...प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो .. :)

      हटाएं
  12. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुतिकरण सुन्दर शब्द चयन,आभार है आपका

    आज की मेरी नई रचना जो आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है


    ये कैसी मोहब्बत है

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