शनिवार, 20 अप्रैल 2013

ऐ मेरे नादान दिल













ऐ मेरे नादान दिल
अब तो संभल जा
सच का सामना कर
सपनों को भूल जा .....

जिन्दगी-ऐ-सेहरा है ये
गहरा सागर नहीं है
अनबुझी सी है प्यास
न तू इसमें डूब जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो ....


सुलगती शमा है ये
सिंदूरी शाम नहीं है
पिघलता है जिस्म इसमें
न तू इसमें जल जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो .....


तन्हाई-ऐ-महफ़िल है ये
शाम-ऐ-जश्न नहीं है
तिशनगी है जाम इसका
न तू इसे पिए जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो .....


उल्फत का दरिया है
ठहरा साहिल नहीं है
डूबते हैं अरमान इसमें
न तू इसमें बह जा
ऐ मेरे नादान दिल अब तो ....


ऐ मेरे नादान दिल अब तो संभल जा
सच का सामना कर सपनों को भूल जा .....!!



सु~मन 

31 टिप्‍पणियां:

  1. सच का सामना जितनी जल्दी हो उतना अच्छा. बहुत सुन्दर.

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  2. बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,सुंदर'

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  3. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज शनिवार (20-04-2013) के   धूम , जयकार , झगडे , प्यार और मनुहार के साथ (मयंक का कोना)  पर भी होगी!
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!
    सूचनार्थ...सादर!

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  4. हर शेर गहरी सोच दर्शाता है ! बहुत खूबसूरत प्रस्तुति ! वाह !

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  5. अद्भुत भावनाओं से सनी प्रेम की दास्ताँ खुबसूरत प्रेम वाह ....

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  6. बढ़िया है आदरणीया-
    शुभकामनायें-

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  7. नादां ये दिल...बड़ा ज़िद्दी है....कहा नहीं मानेगा...

    अनु

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  8. गहन अनुभूति
    सुंदर रचना
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई

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  9. सच से सामना करती.. लाजवाब भावपूर्ण रचना ....

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  10. जिंदगी की हकीकत से वाबस्ता करती सुन्दर रचना ...

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  11. बहुत सुन्दर रचना है मन को मोह गई :)

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  12. bahut sunder ................prastuti

    @nand

    visit plz..

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  13. bahut sunder .............manmohak rachna

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