शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

वो लड़का ~1














वो लड़का
सारे दिन के
बोझिल पलों को
सुला देता है
थपकियाँ देकर
हर रात
अपने बिस्तर में
आँख मूंदती
बेजान हसरतें
जब निढाल हो
सो जाती हैं
एक कोने में
वो उन्हें लेकर
अपनी हथेली में
सुबकता है रात भर
सुबह उठकर
फिर जीने लगता है
कुछ और बोझिल साँसें
होठों पे मुस्कराहट के साथ
वो लड़का बहुत शातिर है !!


सु-मन 

7 टिप्‍पणियां:

  1. तीसरी पंक्ति में बाझिल को बोझिल कर लें ।
    लड़के बहुत
    शातिर होते हैं
    पता ही नहीं
    चलता है
    उनके हाथ में
    चिपके हुए
    सूखे पत्ते भी
    कुछ नहीं
    कहते हैं ।

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    1. शुक्रिया सुशील जी | गलती ठीक कर ली आभार

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  2. जिजीविषा युक्त है वो लड़का
    बहुत सुंदर

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  3. आपने लिखा....
    मैंने पढ़ा....
    हम चाहते हैं इसे सभ ही पढ़ें....
    इस लिये आप की रचना दिनांक 27/11/2016 को पांच लिंकों का आनंद...
    पर लिंक की गयी है...
    आप भी इस प्रस्तुति में सादर आमंत्रित है।

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  4. आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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