शुक्रवार, 11 नवंबर 2016

गर्माहट










सुनो ! 
याद है वो कड़क धूप 
तपे थे जिसमें हम दोनों 
रख ली है मैंने संभाल के 

शरद में ओढेंगे 
इस गुनगुने मौसम में 
भर देंगे थोड़ी सी गर्माहट !!


सु-मन 

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह, यह आपकी बचाई धूप थोडी गरमाहट हमें भी दे गई ।

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 13 नवम्बर 2016 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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