शनिवार, 7 जुलाई 2018

रविवार, 24 जून 2018

जिंदगी



ठक ठक ...
कौन ? अंदर से आवाज़ आई |
मैं \ बाहर से उत्तर आया |
मैं !! मैं कौन ?
जिंदगी .... , उसने जवाब दिया |
अच्छा ! किसकी ? \ अंदर से सवाल |
तुम्हारी \ भूल गई मुझे ... | इसी बीच मन के अधखुले दरवाजे को लांघ कर उसने भीतर प्रवेश कर लिया |

मैं कभी किसी को नहीं भूलती \ पर अकसर खुद को भूला देती हूँ दूसरों के लिए |
हाँ , मैं जानती हूँ \ उसने कहा
कैसे ?
तुम्हारी जी हुई जिंदगी हूँ ना , तुम्हें अच्छे से जानती हूँ | वो मुस्कराई |
ओह !! आज क्या जानने आई हो | सवालों की तल्खी उदासी को खुद-ब-खुद बयाँ कर रही थी |
देखने आई हूँ कि तुम ठीक हो या नहीं |
क्यूँ ? मुझे क्या हुआ है |
ये तो सिर्फ तुम्हें और मुझे मालूम है |
हम्म |
फिर आज रात फिर से नहीं सोई होगी |
हाँ नहीं सोई \ तो ? जवाब में सवाल की गूँज थी |
मुझे याद करती रही ना \ सोचती रही हर उस पल के बारे में जिसमें हर साँस मौत से लड़ी थी तुम | भूल क्यूँ नहीं जाती तुम ?
क्यूँ हर साल ये दिन याद रखती हो ? जिंदगी बोले जा रही थी |

कैसे भूल जाऊं \ बोलो , कैसे भूल जाऊं | इस दिन का हर पल मेरे आँखों के सामने घूम रहा | जिंदगी और मौत लड़ाई में जीया वो वक्त भूल जाऊं ? अंतर्मन फूट पड़ा |
उसे याद करके भी तो उदास हो जाती हो तुम \ जिंदगी बोली |
तो तुम क्यूँ बार बार मेरे मन में दस्तक देती हो \ तुम तो बीती जिंदगी हो ना \ जी लिया है तुमको , तुम्हारा काम खत्म \ तो क्यूँ बार बार मुझे तंग करती हो |
तुम बुलाती हो मुझे \ जिंदगी बोली
मैं????
हाँ ! तुम....
सुनो ! इस दिन जिंदगी और मौत की लड़ाई जीत कर तुम्हें नई जिंदगी मिली \  मौत की उस लड़ाई में तुमने जो सहन किया वो तुम्हारी हिम्मत थी \ इस दिन को याद रखो ईश्वर को शुक्रिया करने के लिए कि तुमको नई जिंदगी मिली |
मैं तो बीती जिंदगी हूँ किसी भी कमजोर पल इंसान के मन के दरवाजे पर दस्तक दे देती हूँ | पर याद रखना कोई भी दुख मन के गहरेपन से गहरा नहीं होता और हर सुख ताउम्र सकून नहीं देता | वर्तमान में जीना सीखो \ इससे तुम भी खुश रहोगी और मैं भी |
अच्छा ! तुम कैसे ?
क्यूँ ? मुझे ब्रेक नहीं चाहिए क्या ?
हर साल इस दिन मुझे उदास होकर बुला लेती हो \ इतना डिस्टर्ब  करती हो मुझे | जिंदगी बोली |
ओके \ अब नहीं करूँगी
पक्का ??
हम्म ||
तो मैंने जाऊँ ?
हूँ जाओ |
अगली साल तो नहीं बुलाओगी ?
हाँ !!
क्याssss \ जिंदगी पीछे मुड़कर बोली |
ईश्वर का शुक्रिया करने के लिए – उसने उत्तर दिया |
वर्तमान में जीने के लिए खुशनुमा पल छोड़कर बीती जिंदगी मुस्कराहट के साथ मन के दरवाजे के पार निकल गई |

 सु-मन 
( इस लघु कहानी में पात्र को परिभाषित न करना ही उचित लगा सो नहीं किया | शायद ये हर इंसान के अंदर छिपा पात्र है शायद इसलिए )

बुधवार, 6 जून 2018

साँसों की कैद























कोई बंदिश भी नहीं
न कोई बेड़ियाँ हाथों में
फिर भी -
जाने कितनी साँसों की कैद में
जकड़ी है ये जिंदगी ..!!


सु-मन 

शनिवार, 31 मार्च 2018

बुधवार, 18 अक्तूबर 2017

दीप प्रदीप




मैंने दीया जला कर 
कर दी है रोशनी ...
तुम प्रदीप्त बन   
हर लो, मेरा सारा अविश्वास |

मेरे आराध्य !
आस के दीये में 
बची रहे नमी सुबह तलक ||


सु-मन 

दीप पर्व मुबारक !!

बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

बुधवार, 20 सितंबर 2017

आभासी दुनिया का साभासी सच



                               आभासी दुनिया का साभासी सच
                               जो दीखता है वो होता नहीं ,जो होता है वो दीखता नहीं..

                         आज बस में थोड़े कम लोग थे और मेरे सामने की सीट पर बैठी एक लड़की के हाथ में Mobile था । वो कुछ type कर रही थी माने chatting कर रही थी । न चाहकर भी मैं उस पर से अपना ध्यान हटा नही पाई । उसके होठों पर उभर आई मुस्कराहट उसकी आँखों में अजीब सी शोखी पैदा कर रही थी । मैं उसे देखती रही की इस आभासी दुनिया से मिली मुस्कराहट आभासी नहीं, साभासी थी (Realistic) थी । मैं उसके चहरे पर उभरते भावों को देखती रही कुछ भी तो आभासी नही था सब यथार्थ था उसकी मुस्कराहट ,उसके हाथ में वो mobile , उस पर टाइप करते उसके हाथ और उसको देखती हुई मैं .. सब यथार्थ, हकीकत हाँ आभासी था तो इंसान जिससे वो बात कर रही थी जो उस वक़्त न होकर भी इन सब में था /थी ।
                          आज मिली मुस्कराहट कल आंसू भी देगी , गम भी देगी । मिलता है दुख..तय है । सुख और दुख साथ साथ चलते हैं हमेशा । हर सुख आने वाले दुख के लिए नींव तैयार करता है और उसको भोगना पड़ता है क्यूंकि संवेदनाएं कभी आभासी नहीं होती वो यथार्थ से जुड़ी होती हैं । आभासी दुनिया ऐसी ही रहेगी कुछ भी न बदलेगा क्यूंकि नहीं देख पाता कोई तुम्हारे चेहरे पर उभरी मुस्कराहट या  उदासी  ,उसे तो दिखती है बस keypad पर लिखी एक इबारत जिसे पढ़कर या अनपढ़े वो बना देता है कोई स्माईली और इस तरह आपकी संवेदनाएं सिर्फ आभासी बन कर रह जाती हैं एक दिन किसी के लिए !!


(चार साल पहले ऑफिस जाती बार देखे दृश्य से प्रेरित )

सु-मन